8th Pay Commission: क्या है फिटमेंट फैक्टर और इससे आपकी सैलरी में कितना उछाल आएगा?

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8th Pay Commission: क्या है फिटमेंट फैक्टर और इससे आपकी सैलरी में कितना उछाल आएगा?





Introduction:

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग चर्चा का सबसे गर्म विषय बना हुआ है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) क्या है और यह उनकी सैलरी को कैसे प्रभावित करेगा। आइए, आज के इस ब्लॉग में विस्तार से समझते हैं कि 8वें वेतन आयोग में आपकी सैलरी की गणना कैसे होगी।

फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) क्या है?

फिटमेंट फैक्टर एक 'मल्टीप्लायर' (Multiplier) यानी गुणांक है, जिसका उपयोग नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (Basic Pay) और पेंशन निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

सरल शब्दों में कहें तो, आपके पुराने वेतन को नए वेतन ढांचे में फिट करने के लिए जिस नंबर से गुणा किया जाता है, उसे ही फिटमेंट फैक्टर कहते हैं।

8वें वेतन आयोग में संभावित बदलाव

7वें वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये हुई थी। लेकिन 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी यूनियन की मांग है कि इसे बढ़ाकर 2.86 या 3.00 किया जाए।

सैलरी पर क्या असर होगा? (एक उदाहरण)

मान लीजिए कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.86 तय होता है, तो सैलरी की गणना कुछ इस प्रकार होगी:

| विवरण | 7वां वेतन आयोग (वर्तमान) | 8वां वेतन आयोग (संभावित) |

| फिटमेंट फैक्टर | 2.57 | 2.86 |

| न्यूनतम बेसिक सैलरी | ₹18,000 | ₹51,480 (लगभग) |

फिटमेंट फैक्टर बढ़ने के मुख्य लाभ:

 * बेसिक सैलरी में बड़ी वृद्धि: फिटमेंट फैक्टर बढ़ते ही आपकी मूल सैलरी में सीधा इजाफा होता है।

 * महंगाई भत्ता (DA) और अन्य भत्ते: चूंकि DA, HRA और अन्य भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर तय होते हैं, इसलिए आपकी कुल इन-हैंड सैलरी में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

 * पेंशनभोगियों को फायदा: फिटमेंट फैक्टर केवल मौजूदा कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि पेंशनभोगियों की मासिक पेंशन बढ़ाने में भी समान रूप से मदद करता है।

8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद फिटमेंट फैक्टर ही वह मुख्य चाबी होगी जो कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को नई दिशा देगी। हालांकि, सरकार की ओर से आधिकारिक मुहर लगना अभी बाकी है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि 2026 तक कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।

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> क्या आप जानते हैं कि 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) आपकी सैलरी को रातों-रात कितना बदल सकता है? 2.57 से बढ़कर अगर यह 2.86 होता है, तो आपकी बेसिक सैलरी पर क्या असर पड़ेगा?

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   * "8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर का गणित"

  

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 * Minimum basic pay in 8th pay commission

 * Difference between 7th and 8th pay commission

 "साल 2026 की शुरुआत के साथ ही कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं क्योंकि इसी साल से नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने की चर्चा है।"

हिंदी मकर संक्रांति शायरी बहुत बड़ा कलेक्शन

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Makar Sankranti 2026: उत्तरायण पर शानदार हिंदी शायरी और संदेश (Best Uttarayan Quotes & Status)

उत्तरायण या मकर संक्रांति का त्योहार केवल पतंगबाजी का उत्सव नहीं है, बल्कि यह सूर्य के उत्तरायण होने और जीवन में नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करने के लिए यहाँ सबसे बेहतरीन और दिल छू लेने वाली मकर संक्रांति शायरी का संग्रह दिया गया है।





1. उत्तरायण और नई उम्मीद की शायरी

आसमां में रंगों की छटा निराली छायेगी,

हर तरफ पतंगों की हसीन दुनिया नज़र आयेगी,

काट सके न कोई आपकी खुशियों की डोर,

ये उत्तरायण आपके लिए नयी उम्मीद लायेगी।

2. रिश्तों में मिठास और सौगात

मीठे गुड़ में मिल गया तिल का साथ,

पतंग संग हो रही है हर पल मुलाकात,

उत्तरायण का ये त्योहार है बड़ा प्यारा,

मुबारक हो आपको खुशियों की ये सौगात।

3. गगन में मस्ती और उत्साह

ढील दे दो पतंग को, उड़ने दो गगन में,

आज भरी है मस्ती सबके मन में,

'काप्यो छे' के नारों से गूंजेगा आसमां,

मनाओ उत्तरायण अपने पूरे चमन में।

4. दोस्ती और एकजुटता का शोर

छत पर हो दोस्तों की टोली और शोर,

हाथ में हो फिरकी और मजबूत डोर,

काट देंगे हर मुसीबत की पतंग को,

क्योंकि उत्तरायण का है आज चारों तरफ ज़ोर।

5. सफलता की ऊँची उड़ान

उम्मीदों की पतंग उड़े नीले आसमान में,

आपकी कामयाबी के चर्चे हों पूरे जहान में,

खुशियों की फिरकी सदा आपके हाथ रहे,

कोई गम न आए आपके हसीन मकान में।

6. खेल भावना और मुस्कुराहट

काटो पतंग मगर किसी का दिल न दुखाना,

आज छत पर चढ़कर जमकर जश्न मनाना,

जो कट जाए पतंग तो गम न करना,

मुस्कुराकर फिर से नयी पतंग उड़ाना।

7. सूर्य परिवर्तन और मंगल कामना

सूरज की राशि बदलेगी, बदलेगा सबका हाल,

उत्तरायण का पर्व लाया है खुशियों की चाल,

गगन में गूंजेगा जब 'काय पो छे' का शोर,

मंगलमय हो आपके लिए नया ये साल।

8. पर्व की रौनक और उल्लास

रंग-बिरंगी पतंगों से सज़ा है आसमान,

देखकर ये नज़ारा खुश है हर इंसान,

तिल-गुड़ के लड्डू और अपनों का प्यार,

मुबारक हो आपको उत्तरायण का त्योहार।

9. कामयाबी और खुशियों के रंग

मंजिल की ऊंचाइयों को छू ले आपकी पतंग,

जीवन में भर जाए खुशियों के नए रंग,

बुलंदियों पर नाम हो आपका दुनिया में,

कामयाबी रहे सदा आपके संग।

10. पतंगबाजी की मस्ती

नीले गगन में लाल गुलाबी रंगों की बहार है,

हर कोई पतंग उड़ाने को बेकरार और तैयार है,

पेंच लड़ाओ, पतंग काटो, पर हंसते रहो,

क्योंकि ये उत्तरायण खुशियों का त्योहार है।

11. छत की पुरानी यादें

शोर मचेगा जब पतंगें टकराएंगी बीच में,

गूंजेगा 'लपेट' का शोर हर गली और कीच में,

मंझे की धार से आसमान भी बोल उठेगा,

खो जाओ आज बस यादों की खींच में।

12. स्नेह और अपनापन

तिल की खुशबू और गुड़ की मिठास,

दिलों में जागेगी आज नयी आस,

उत्तरायण के इस पावन पर्व पर,

खुशियाँ आए आपके और आपके अपनों के पास।

विशेष: पक्षी बचाओ संदेश (Save Birds Awareness Quotes)

उत्तरायण की खुशी मनाते समय हमारे नन्हे बेजुबान पक्षियों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी हमारा कर्तव्य है।

13. मानवता और करुणा

उड़ान ऐसी हो जो किसी के पंख न काटे,

खुशी ऐसी हो जो बस प्यार बांटे,

हमारे जश्न में किसी बेजुबान का खून न बहे,

आसमान में परिंदे भी रहें बिना किसी घाटे।

14. बेजुबानों का आसमान

मंझे की धार में मासूमों की जान न फंसे,

ऐसा न हो कि हमारी जीत पर कोई परिंदा रोये,

पतंग उड़ाओ खुशी से पर ये याद रहे,

आसमान उनका भी है, जिसे हम अपना समझें।

15. समय का ध्यान (Safe Time for Birds)

सुबह और शाम जब परिंदे घर को जाते हैं,

तब मंझे अक्सर उनके पर काट जाते हैं,

जरा रुक कर ढील दो उन बेजुबानों के लिए,

जो उड़ते-उड़ते लहूलुहान हो जाते हैं।

16. आदर्श त्योहार

त्योहार वही है जिसमें सबका भला हो,

किसी पक्षी के लिए मंझा न काल की कला हो,

उड़ाओ पतंग पर सावधानी का दामन थाम कर,

आपके दिल में बस दया और करुणा हो।


मकर संक्रांति का यह पर्व आपके जीवन में मिठास और ऊंचाइयां लेकर आए। पतंग उड़ाएं, जश्न मनाएं लेकिन सुरक्षा और करुणा का साथ न छोड़ें। आप सभी को हैप्पी उत्तरायण!

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मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर पढ़ें बेहतरीन उत्तरायण हिंदी शायरी, स्टेटस और पक्षी बचाओ संदेश। तिल-गुड़ की मिठास और पतंगों की उड़ान के साथ अपने प्रियजनों को भेजें ये शानदार शुभकामनाएँ और मनाएँ एक सुरक्षित त्योहार।

हिंदी मकर संक्रांति शायरी बहुत बड़ा कलेक्शन 




हिंदी मकर संक्रांति शायरी बहुत बड़ा कलेक्शन 

पैदल चलने के अद्भुत फायदे: कब, कितना और किसे नहीं चलना चाहिए?

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पैदल चलने के अद्भुत फायदे: कब, कितना और किसे नहीं चलना चाहिए?





स्वस्थ रहने का सबसे आसान तरीका है—पैदल चलना। इमेज में दी गई जानकारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय के अनुसार, दिन की कुछ मिनटों की सैर आपके जीवन को बदल सकती है।

1. कितनी देर चलने से क्या लाभ होगा?

इमेज के अनुसार, पैदल चलने का समय आपके शरीर पर अलग-अलग प्रभाव डालता है:

 * 2 से 5 मिनट: अचानक मृत्यु के जोखिम को 33% तक कम करता है।

 * 5 से 15 मिनट: आपकी कार्यक्षमता 60% तक बढ़ जाती है और स्फूर्ति आती है।

 * 15 से 20 मिनट: ब्लड शुगर (Sugar) को कम करने में मदद मिलती है।

 * 20 से 30 मिनट: प्रकृति के बीच टहलने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।

 * 30 से 35 मिनट: हृदय रोगों (Heart Disease) का खतरा कम होता है।

 * 40 से 50 मिनट: हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) को नियंत्रित करने में सहायक है।

 * याददाश्त के लिए: हफ्ते में 3 दिन 45 मिनट चलने से याददाश्त बढ़ती है।

> विशेष टिप: चलते समय अंगूठे को मुट्ठी के अंदर रखकर उंगलियों से दबाव देने पर बीपी (BP) कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

2. कब और कितना चलना चाहिए?

 * सही समय: सुबह की सैर (Morning Walk) सबसे उत्तम है क्योंकि ताजी हवा और विटामिन-D मिलता है। रात को भोजन के बाद 10-15 मिनट टहलना पाचन के लिए बेहतर है।

 * कितना चलें: एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में कम से कम 30 से 45 मिनट या लगभग 8,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखना चाहिए।

3. किस बीमारी में पैदल चलने से बचें? (सावधानियां)

हालांकि चलना फायदेमंद है, लेकिन निम्नलिखित स्थितियों में सावधानी बरतें या डॉक्टर से सलाह लें:

 * गंभीर जोड़ों का दर्द: यदि घुटनों में सूजन या 'गंभीर अर्थराइटिस' है, तो अधिक चलने से घर्षण बढ़ सकता है।

 * हृदय रोग: यदि चलने पर सीने में दर्द या भारीपन महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं।

 * सांस की तकलीफ: अस्थमा या सांस फूलने की समस्या होने पर बहुत तेज न चलें।

 * हाल ही में हुई सर्जरी: पेट या पैरों के ऑपरेशन के बाद डॉक्टर की अनुमति के बिना लंबी सैर न करें।

 * अत्यधिक हाई बीपी: यदि ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ हो, तो पहले उसे सामान्य होने दें।

निष्कर्ष:

पैदल चलना न केवल आपको बीमारियों से बचाता है, बल्कि आपके जीवन की गुणवत्ता भी सुधारता है। तो चलिए, आज से ही चलने का संकल्प लें और दूसरों को भी प्रेरित करें।


2026 में गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन के लिए टॉप 8 वॉइस चेंजर ऐप्स

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2026 में गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन के लिए टॉप 8 वॉइस चेंजर ऐप्स





आज के डिजिटल युग में अपनी पहचान सुरक्षित रखना हो या सोशल मीडिया पर मजेदार वीडियो बनाना, Voice Changer Apps की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। चाहे आप एक गेमर हों, यूट्यूबर हों या बस दोस्तों के साथ प्रैंक करना चाहते हों, आधुनिक AI तकनीक ने आवाज बदलना अब बेहद आसान और असली बना दिया है।

इस ब्लॉग में, हम आपको 2026 के टॉप 8 वॉइस चेंजर ऐप्स के बारे में विस्तार से बताएंगे।

1. Voicemod (गेमर्स और स्ट्रीमर्स के लिए बेस्ट)

Voicemod गेमिंग की दुनिया में सबसे मशहूर नाम है। यह Discord, Twitch और गेमिंग के दौरान रीयल-टाइम में आपकी आवाज बदल सकता है।

 * खासियत: इसमें 150 से ज्यादा AI आवाजें हैं।

 * प्लेटफॉर्म: Windows, macOS, Android और iOS।

2. ElevenLabs (सबसे असली AI आवाज के लिए)

अगर आप चाहते हैं कि आपकी बदली हुई आवाज बिल्कुल असली इंसान जैसी लगे, तो ElevenLabs बेस्ट है। इसकी "Speech-to-Speech" तकनीक आपकी भावनाओं को भी बरकरार रखती है।

 * खासियत: सेलिब्रिटी जैसी आवाजें और 29 से ज्यादा भाषाओं का सपोर्ट।

 * प्लेटफॉर्म: iOS, Android और Web।

3. Voice.ai (अनलिमिटेड आवाजों का खजाना)

Voice.ai अपनी "Voice Universe" लाइब्रेरी के लिए जाना जाता है, जहाँ हजारों यूजर्स अपनी बनाई हुई आवाजें शेयर करते हैं।

 * खासियत: इसमें आप खुद की AI आवाज भी ट्रेन कर सकते हैं।

 * प्लेटफॉर्म: Windows, macOS, मोबाइल।

4. MagicMic (सोशल मीडिया और प्रैंक्स के लिए)

अगर आप रील या शॉर्ट्स बनाते हैं, तो MagicMic आपके लिए बेहतरीन है। इसमें 500 से ज्यादा फिल्टर और मजेदार साउंड इफेक्ट्स मिलते हैं।

 * खासियत: एनीमे और मूवी किरदारों की आवाजें।

 * प्लेटफॉर्म: Android, iOS, और PC।

5. Voice Changer with Effects (साधारण और मजेदार)

यह उन लोगों के लिए है जो ज्यादा तामझाम नहीं चाहते। इसे इस्तेमाल करना बहुत आसान है और यह पूरी तरह से मनोरंजन के लिए बना है।

 * खासियत: हीलियम, रोबोट और एलियन जैसे क्लासिक इफेक्ट्स।

 * प्लेटफॉर्म: Android और iOS।

6. Murf AI (प्रोफेशनल वॉयसओवर के लिए)

Murf AI का इस्तेमाल यूट्यूब वीडियो या प्रेजेंटेशन के लिए किया जाता है। यह आवाज को इतना साफ बनाता है जैसे किसी स्टूडियो में रिकॉर्ड की गई हो।

 * खासियत: आवाज की पिच और स्पीड को कंट्रोल करने की सुविधा।

 * प्लेटफॉर्म: Web और Mobile।

7. Voice Changer Plus (iPhone यूजर्स की पसंद)

iPhone और iPad यूजर्स के लिए यह एक शानदार ऐप है। इसमें आप अपनी आवाज रिकॉर्ड करके उसे अलग-अलग इफेक्ट्स के साथ शेयर कर सकते हैं।

 * खासियत: 55 से ज्यादा वॉयस इफेक्ट्स और बैकग्राउंड साउंड्स।

 * प्लेटफॉर्म: केवल iOS।

8. MetaVoice (हाई-क्वालिटी लाइव स्ट्रीमिंग)

MetaVoice गेमिंग के दौरान बिना किसी देरी (Latency) के आपकी आवाज बदलता है। यह आपकी पहचान छिपाने के लिए सबसे प्रोफेशनल टूल है।

 * खासियत: आपकी बोलने की शैली को बरकरार रखते हुए आवाज बदलना।

 * प्लेटफॉर्म: macOS और iOS।

निष्कर्ष

सही ऐप का चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आप गेमिंग करते हैं तो Voicemod बेस्ट है, और अगर आप प्रोफेशनल वीडियो बनाना चाहते हैं तो ElevenLabs या Murf AI की ओर जा सकते हैं।

2026 में गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन के लिए टॉप 8 वॉइस चेंजर ऐप्स

1. आकर्षक टाइटल (SEO-Friendly Titles)

आप अपनी पसंद के अनुसार इनमें से कोई एक चुन सकते हैं:

 * विकल्प A: 2026 के 8 सबसे बेहतरीन Voice Changer Apps: गेमिंग और वीडियो के लिए बेस्ट!

 * विकल्प B: आवाज बदलने वाले टॉप 8 ऐप्स (2026): असली AI आवाजों के साथ।

 * विकल्प C (Best for Clicks): अपनी आवाज को कैसे बदलें? ये हैं 2026 के टॉप 8 Voice Changer Apps।

2. मेटा डिस्क्रिप्शन (Meta Description)

यह हिस्सा Google सर्च रिजल्ट में टाइटल के नीचे दिखाई देता है। यह पाठकों को लिंक पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करता है।

> "क्या आप अपनी आवाज बदलकर गेमिंग या वीडियो बनाना चाहते हैं? इस ब्लॉग में जानें 2026 के टॉप 8 Voice Changer Apps के बारे में, जो AI तकनीक से आपकी आवाज को पूरी तरह बदल देंगे। लिस्ट देखें और अपना पसंदीदा ऐप चुनें!"

3. सर्च कीवर्ड्स (Keywords for Tags)

पोस्ट पब्लिश करते समय इन टैग्स का इस्तेमाल करें ताकि लोग इसे आसानी से ढूंढ सकें:

 * Voice Changer Apps 2026

 * Best AI Voice Changer Hindi

 * गेमिंग के लिए वॉइस चेंजर

 * Real-time Voice Changer for Discord

 * आवाज बदलने वाला ऐप


भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी: एक राजनेता, कवि और राष्ट्रनायक का जीवन परिचय

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Meta Description: अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की जीवनी, उनकी राजनीतिक उपलब्धियां, कविताएं और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके ऐतिहासिक निर्णयों के बारे में विस्तार से जानें।

प्रस्तावना

भारतीय राजनीति के इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसा नाम है जिसे न केवल उनके समर्थक बल्कि उनके विरोधी भी पूरे सम्मान के साथ याद करते हैं। वे एक प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि और दूरदर्शी राजनेता थे। उन्होंने भारत को परमाणु शक्ति बनाया और देश की बुनियादी संरचना (Infrastructure) को एक नई दिशा दी। आज के इस ब्लॉग में हम 'अटल' व्यक्तित्व के धनी वाजपेयी जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी: संक्षिप्त परिचय (Quick Overview)

 * जन्म: 25 दिसंबर 1924 (ग्वालियर, मध्य प्रदेश)

 * राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी (BJP)

 * पद: भारत के 10वें प्रधानमंत्री

 * सम्मान: भारत रत्न (2015), पद्म विभूषण (1992)

 * निधन: 16 अगस्त 2018

प्रधानमंत्री के रूप में ऐतिहासिक निर्णय

अटल जी का कार्यकाल भारत के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। उनके कुछ प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:

1. पोखरण-2 परमाणु परीक्षण (1998)

मई 1998 में अटल जी के नेतृत्व में भारत ने राजस्थान के पोखरण में पांच सफल परमाणु परीक्षण किए। पूरी दुनिया के दबाव के बावजूद अटल जी अडिग रहे और भारत को 'परमाणु शक्ति संपन्न' राष्ट्र घोषित किया। इसी दौरान उन्होंने 'जय जवान, जय किसान' के नारे में 'जय विज्ञान' भी जोड़ा।

2. स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (Golden Quadrilateral)

देश के विकास के लिए सड़कों का होना अनिवार्य है, यह अटल जी बखूबी जानते थे। उन्होंने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाली विशाल सड़क परियोजना शुरू की, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बदल दी।

3. कारगिल विजय (1999)

जब पाकिस्तान ने पीठ पीछे छुरा घोंपते हुए कारगिल पर कब्जा करने की कोशिश की, तब अटल जी के दृढ़ संकल्प और भारतीय सेना के पराक्रम ने दुश्मन को धूल चटा दी। 'ऑपरेशन विजय' के माध्यम से भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा की।

4. सर्व शिक्षा अभियान

अटल जी का मानना था कि शिक्षित भारत ही विकसित भारत बन सकता है। उन्होंने 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु 'सर्व शिक्षा अभियान' की शुरुआत की।

कवि हृदय राजनेता

अटल जी जितने कठोर फैसले लेने के लिए जाने जाते थे, उतने ही कोमल हृदय के कवि भी थे। उनकी कविताओं में राष्ट्रवाद, मानवता और जीवन का दर्शन झलकता है। उनका कविता संग्रह 'मेरी इक्यावन कविताएं' साहित्य जगत की अनमोल धरोहर है।

> "बाधाएं आती हैं आएं, घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

> पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

> निज हाथों में हंसते-हंसते, आग लगाकर जलना होगा।

> कदम मिलाकर चलना होगा।"

सुशासन दिवस (Good Governance Day)

अटल जी के योगदान को सम्मान देने के लिए उनके जन्मदिन यानी 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष भारत में 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को समर्पित है।

निष्कर्ष

अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन हमें सिखाता है कि राजनीति में रहते हुए भी कैसे मर्यादा और शालीनता बनाए रखी जा सकती है। वे सही मायने में 'अजातशत्रु' थे। उनका जाना भारतीय राजनीति के एक युग का अंत था, लेकिन उनके विचार और आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।



अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. अटल बिहारी वाजपेयी कितनी बार भारत के प्रधानमंत्री बने?

अटल बिहारी वाजपेयी कुल तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 1996 में (13 दिन के लिए), दूसरी बार 1998-1999 में (13 महीने के लिए) और तीसरी बार 1999 से 2004 तक (पूरे 5 साल के लिए)।

2. अटल जी को 'भारत रत्न' से कब सम्मानित किया गया था?

अटल बिहारी वाजपेयी जी को वर्ष 2015 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया था।

3. 'सुशासन दिवस' (Good Governance Day) क्यों मनाया जाता है?

अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन, 25 दिसंबर को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देना और अटल जी के योगदान को याद करना है।

4. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध पुस्तक कौन सी है?

अटल जी एक महान लेखक और कवि थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में 'मेरी इक्यावन कविताएँ', 'संसद के तीन दशक' और 'राजनीति की रपटीली राहें' शामिल हैं।

5. अटल जी ने कौन सा प्रसिद्ध नारा दिया था?

1998 के परमाणु परीक्षण के बाद अटल जी ने लाल बहादुर शास्त्री के नारे को आगे बढ़ाते हुए "जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान" का प्रसिद्ध नारा दिया था।

अतिरिक्त सुझाव (Bonus Tips for Blog):

 * Internal Link: अगर आपने लाल बहादुर शास्त्री या पोखरण परीक्षण पर कोई और लेख लिखा है, तो उसे यहाँ लिंक करें।

 * External Link: आप विकिपीडिया या सरकारी पोर्टल (जैसे- pmindia.gov.in) का लिंक दे सकते हैं जहाँ अटल जी की प्रोफाइल हो।

 * Call to Action (CTA): पोस्ट के अंत में पाठकों से पूछें— "अटल जी की कौन सी कविता आपको सबसे ज्यादा पसंद है? कमेंट में जरूर बताएं!" 

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गुजरात राज्य में लोग गरबा गाने के बहुत शौकीन होते हैं। आपको अपने आसपास और आसपास गरबा खेलने के शौकीन लोग मिल जाएंगे। जैसे ही नवरात्रि का त्योहार आता है तो हर कोई गरबा गाने के लिए दौड़ पड़ता है। लोग खाना-पीना भूल जाते हैं। वे काम पर हैं, वे काम से जल्दी घर आते हैं और गरबा देखने जाते हैं। कुछ लोग सुबह से शाम के गरबा और रात के गरबा की तैयारी शुरू कर देते हैं। मौसम पहले जैसा नहीं है। अब गरबा रात को जल्दी बंद करना पड़ता है। हम आप तक पहुंच रहे हैं लाइव गरबा के लिंक के लिए आपको प्रोजेक्ट 303 व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ना होगा।




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हिंदी ज्ञानीस्थान-०१ हिंदी समाचार पढ़ने वाले और अपडेट के लिए यह पोस्ट सदा सेव रखें

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हिंदी में समाचार पढ़ना हिंदी में समाचार प्राप्त करने में कई कठिनाइयां होती हैं या Google में खोज करना भी बहुत मुश्किल होता है इसलिए हम आपके लिए विशेष रूप से हिंदी में समाचार के लिए एक उपयोगी पोस्ट लाते हैं यदि आप कोई पुरानी खबर पढ़ना चाहते हैं या नई जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो यह पोस्ट होगी वास्तव में आपके लिए उपयोगी, आपके आस-पास ऐसे कई लोग हैं जो हिंदी में समाचार प्राप्त करना चाहते हैं और जिन लोगों को हिंदी में समाचार प्राप्त करने की आवश्यकता है, हम यहां आपको हिंदी ज्ञानस्थान के माध्यम से विभिन्न हिंदी समाचार प्रदान करने और नवीनतम समाचार रखने के लिए हैं। हम करेंगे इसे उन मित्रों को देना जारी रखें जो हिंदी में समाचार पाना चाहते हैं जिनके पास खोजने का समय नहीं है और वे सीधे इस पर क्लिक करके समाचार पढ़ना चाहते हैं। यदि आप Google में खोजते हैं, तो आपको Google से उपयोगी समाचार मिलेंगे। लेकिन आपको इसके लिए समय निकालने की आवश्यकता है लेकिन हमारे माध्यम से सीधे अपने व्हाट्सएप पर अपने ग्रुप में यदि आप व्हाट्सएप में जुड़े हुए हैं तो सीधे आपको अपने मोबाइल पर संदेश मिलता है और उस पर क्लिक करके आप उपयोगी जानकारी पढ़ सकते हैं जो हम प्राप्त करना चाहते हैं और हमारा जुनून किसी व्यक्ति के अच्छे काम को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए हमारे माध्यम के रूप में कार्य करना है। तो अब उपयोगी जानकारी हमने लोगों तक पहुंचाने के लिए एक विशेष प्रकार का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, आप इससे जुड़ें और ऐसी उपयोगी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे, इससे किसी की मदद होती है, किसी का समय बचता है और आवश्यक जानकारी मिलती रहती है, इसलिए विशेष के लिए व्हाट्सएप करें उपयोगी जानकारी। अनुरोध है कि ग्रुप से जुड़ें और नियमित रूप से ऐसी विभिन्न खबरें पाने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें 



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कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम वर्ष -2023 सभी एक सूचना में

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कक्षा 10वीं और 12वीं का परिणाम वर्ष -2023 सभी एक सूचना में



यहाँ 10वीं कक्षा से संबंधित विभिन्न समाचारों का विवरण संकलित करके 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी विभिन्न सूचनाओं को संकलित करने का प्रयास किया गया है जो 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है और इसके बाद क्या करें कक्षा 10 का परिणाम। कक्षा 11 में अध्ययन करने के लिए कौन सा पाठ्यक्रम शामिल किया जा सकता है या कौन सी धारा ली जा सकती है क्योंकि कक्षा 10 के परिणाम के बाद कक्षा 11 में तीन प्रकार की धाराएँ होती हैं, कुछ छात्र कक्षा 10 के बाद विज्ञान धारा लेते हैं और इसमें असफल हो रहे हैं और बहुत थका देने वाला है तो बच्चे को अपनी योग्यता के अनुसार अपनी योग्यता के अनुसार खुद को चुनना चाहिए कि बच्चों ने वास्तव में बहुत मेहनत की है दिल से बहुत मेहनत की है और सहनशक्ति कम है

आ गए हैं या जो वे वास्तव में जानते थे वह परीक्षा में नहीं पूछा गया था और उसके कारण अंक कम हैं तो ऐसे छात्र विज्ञान को ध्यान में रखते हुए और कड़ी मेहनत करके अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं लेकिन कुछ छात्रों ने कम मेहनत या प्रश्न या यहां तक ​​कि बुनियादी संचालन भी कम किया है या वे छात्र जो कौशल या उससे संबंधित कठिन प्रश्नों के ज्ञान की कमी के कारण कम अंक प्राप्त करते हैं, उन्हें वाणिज्य या कला का चयन करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी कोई कठिनाई न हो। खड़े होने के लिए, सभी छात्रों और माता- पिता से अनुरोध है अपने बच्चे की स्ट्रीम चुनने से पहले बहुत सोच- विचार करें और उसके बाद ही प्रगति या अन्य कार्य शुरू करें। यह लिंक नहीं पहुंचा है जो हमारे व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल नहीं हुए हैं वे ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करके मेरे व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल हो सकते हैं। जो इस बारे में सोच रहे हैं कि 10वीं कक्षा के बाद वे अपनी प्रगति के लिए क्या कर सकते हैं और वे सभी जो अपने भविष्य के बारे में चिंतित हैं, सभी मित्र इस पोस्ट को अपने पास रखें यहां विभिन्न जानकारी अपडेट की जाएगी और अधिक लोगों तक पहुंचेगी कक्षा 10 के परिणाम के बारे में विभिन्न जानकारी के लिए कक्षा 10 के परिणाम देने का अनुरोध इस पोस्ट को सहेजें


कोरोना टूलकिट तैयार किया है और आप चाहे तो खरीद सकते हो

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कोरोना टूलकिट तैयार किया है और आप चाहे तो खरीद सकते हो

क्या क्या चीजे होनी चाहिए इसकी हमने आज पूरी लिस्ट बनाई है और उन सारी चीजों के आधार पर आपके लिए टूलकिट तैयार किया है और आप चाहे तो पहनो पेपर लेकर इस टूल किट में क्या क्या होना चाहिए वह अपलोड कर लीजिए टूलकिट हमने कई डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद तैयार किया है जिसमें कुल 10 चीजें हैं तो इस टूल किट में 10 चीजें हैं अलग-अलग लोगों से पूछा है उसके आधार पर उसका जो नतीजा है वह आपके सामने हम रख रहे हैं टेंपरेचर थर्मामीटर की जांच करने के लिए सबसे पहले तो यह काम करें

पहली चीजों के घर में हूं नहीं चाहिए वह है टेंपरेचर मॉनिटर यानी थर्मामीटर जिसे आप कहते हैं जो बुखार की जांच करने के लिए सबसे जरूरी है अगर आपने अपने घर पर थर्मामीटर नहीं रखा है तो आप आज ही सबसे पहले तो यह काम करें कि थर्मामीटर खरीदें दूसरा है पल्स ऑक्सीमीटर यह एक प्रकार की छोटी सी मशीन होती है जिससे आप घर बैठे ही अपना ऑक्सीजन लेवल चेक कर सकते हैं और कम हो गया तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए तुरंत अस्पताल चले जाना चाहिए 94 से नीचे चला जाता है तो यह जरूर होना चाहिए खरीद लीजिए इसको पूरा परिवार इस्तेमाल कर सकता है तीसरा है जिसे आप जैसे आप भाग ले सकते हैं सांस लेने में तकलीफ होने पर या पर काफी काम आता है आपको सिस्टीम जरूर लेनी चाहिए भाप लेने चाहिए इस समय आपके घर में जैसा भी सिमर उपलब्ध हो या बाजार में आप अपने हिसाब से खरीद लीजिए क्योंकि आपको ठीक लगता है लेकिन यह समय आपके लिए जरूरी है जरूरी है इसका एक घर में रखनी चाहिए पेरासिटामोल की गोली जैसे आप इसीलिए कहते हैं यह आपके लिए बहुत जरूरी है इसका एक पत्ता आप घर में रखनी चाहिए पांचवी चीज है एंटी ऐसे टेबलेट यदि आपके पास होनी चाहिए कोई भी अपने सकते हैं डॉक्टर कोरोनावायरस से बचाव के लिए गर्म पानी पीने की सलाह देते हैं ऐसे में यहां पर घर पर होना चाहिए जिनके घर पर नहीं है आप खरीद लीजिए या फिर तो हम आपको बताना चाह रहे हैं वह यह है कि आपको दिन में कम से कम पांच से छह बार गर्म पानी जरूर पीना चाहिए 8 में होनी चाहिए दालचीनी अदरक और मुनक्का वगैरह होनी चाहिए जिसके आधार पर आप इस तरह की कोई चीज बना सके यह सारी चीजें बहुत सारी दवाईयां भी आ रही है बाजार में जो की कहती है दावा करते हैं कि आपकी बेटी को करती है यह सब आप ले सकते हैंठीक कर सकते हैं और 10 वाट उन्हें स्ट्रेच बैंड जिससे आप घर पर रहकर ही कई प्रकार की एक्साइज कर सकते हैं व्यायाम कर सकते हैं इसमें हमारा जो कहने का मकसद है आपको वह यह है कि आपको व्यायाम नहीं छोड़ना है एक नई स्टडी आई है जो यह कहती है कि कोरोनावायरस शरीर पर ज्यादा हमला करता है जो शरीर व्यायाम नहीं करते इसलिए व्यायाम जरूर कीजिए व्यायाम बिल्कुल मत छोड़िए और साक्षी मानकर चल रहे हैं कि आपके पास जरूर होगा आपके चेहरे पर हर समय रहता होगा जब भी आप बाहर निकलते अपने घर से और साथ ही आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करेंगे तो यह आपके पास है तो काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं और सकते हैं

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क्या क्या चीजे होनी चाहिए इसकी हमने आज पूरी लिस्ट बनाई है और उन सारी चीजों के आधार पर आपके लिए टूलकिट तैयार किया है और आप चाहे तो पहनो पेपर लेकर इस टूल किट में क्या क्या होना चाहिए वह अपलोड कर लीजिए टूलकिट हमने कई डॉक्टरों से बातचीत करने के बाद तैयार किया है जिसमें कुल 10 चीजें हैं तो इस टूल किट में 10 चीजें हैं अलग-अलग लोगों से पूछा है उसके आधार पर उसका जो नतीजा है वह आपके सामने हम रख रहे हैं टेंपरेचर थर्मामीटर की जांच करने के लिए सबसे पहले तो यह काम करें

पहली चीजों के घर में हूं नहीं चाहिए वह है टेंपरेचर मॉनिटर यानी थर्मामीटर जिसे आप कहते हैं जो बुखार की जांच करने के लिए सबसे जरूरी है अगर आपने अपने घर पर थर्मामीटर नहीं रखा है तो आप आज ही सबसे पहले तो यह काम करें कि थर्मामीटर खरीदें दूसरा है पल्स ऑक्सीमीटर यह एक प्रकार की छोटी सी मशीन होती है जिससे आप घर बैठे ही अपना ऑक्सीजन लेवल चेक कर सकते हैं और कम हो गया तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए तुरंत अस्पताल चले जाना चाहिए 94 से नीचे चला जाता है तो यह जरूर होना चाहिए खरीद लीजिए इसको पूरा परिवार इस्तेमाल कर सकता है तीसरा है जिसे आप जैसे आप भाग ले सकते हैं सांस लेने में तकलीफ होने पर या पर काफी काम आता है आपको सिस्टीम जरूर लेनी चाहिए भाप लेने चाहिए इस समय आपके घर में जैसा भी सिमर उपलब्ध हो या बाजार में आप अपने हिसाब से खरीद लीजिए क्योंकि आपको ठीक लगता है लेकिन यह समय आपके लिए जरूरी है जरूरी है इसका एक घर में रखनी चाहिए पेरासिटामोल की गोली जैसे आप इसीलिए कहते हैं यह आपके लिए बहुत जरूरी है इसका एक पत्ता आप घर में रखनी चाहिए पांचवी चीज है एंटी ऐसे टेबलेट यदि आपके पास होनी चाहिए कोई भी अपने सकते हैं डॉक्टर कोरोनावायरस से बचाव के लिए गर्म पानी पीने की सलाह देते हैं ऐसे में यहां पर घर पर होना चाहिए जिनके घर पर नहीं है आप खरीद लीजिए या फिर तो हम आपको बताना चाह रहे हैं वह यह है कि आपको दिन में कम से कम पांच से छह बार गर्म पानी जरूर पीना चाहिए 8 में होनी चाहिए दालचीनी अदरक और मुनक्का वगैरह होनी चाहिए जिसके आधार पर आप इस तरह की कोई चीज बना सके यह सारी चीजें बहुत सारी दवाईयां भी आ रही है बाजार में जो की कहती है दावा करते हैं कि आपकी बेटी को करती है यह सब आप ले सकते हैंठीक कर सकते हैं और 10 वाट उन्हें स्ट्रेच बैंड जिससे आप घर पर रहकर ही कई प्रकार की एक्साइज कर सकते हैं व्यायाम कर सकते हैं इसमें हमारा जो कहने का मकसद है आपको वह यह है कि आपको व्यायाम नहीं छोड़ना है एक नई स्टडी आई है जो यह कहती है कि कोरोनावायरस शरीर पर ज्यादा हमला करता है जो शरीर व्यायाम नहीं करते इसलिए व्यायाम जरूर कीजिए व्यायाम बिल्कुल मत छोड़िए और साक्षी मानकर चल रहे हैं कि आपके पास जरूर होगा आपके चेहरे पर हर समय रहता होगा जब भी आप बाहर निकलते अपने घर से और साथ ही आप सोशल डिस्टेंसिंग का पालन जरूर करेंगे तो यह आपके पास है तो काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं और सकते हैं

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प्राथमिक (Std। 1 से 8) के तहत स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (प्राथमिक) और स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (माध्यमिक) के लिए बजट प्रावधान

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प्राथमिक (Std। 1 से 8) के तहत स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (प्राथमिक) और स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (माध्यमिक) के लिए बजट प्रावधान 




 शिक्षा का अधिकार गुजरात स्कूल शिक्षा परिषद राज्य परियोजना कार्यालय, समागम शिक्षा क्षेत्र -12, गांधीनगर फोन नंबर: 09-212 ई - मेल: gecell@gmail.com टोल फ्री नंबर .800-233-7965 सर्व शिक्षा अभियान संख्या: एसएसए /। QE सेल / 1/2021 / (43-03 तारीख: 3/06/2071 प्रितिस्री, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, अधिकारी, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट विषय: राकेट सुरक्षा कार्यक्रम के तहत अनुदान आवंटन का विषय। PAB 20 20-2021, प्राथमिक (Std। 1 से 8) के तहत स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (प्राथमिक) और स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम (माध्यमिक) के लिए बजट प्रावधान के अनुसार, 3 स्कूलों और 150 में प्रति स्कूल 500 रुपये का एक निश्चित अनुदान मंजूर किया गया है। माध्यमिक (मानक 9 से 12) स्कूल। स्कूलों की सूची इसके साथ संलग्न है। इस अनुदान के तहत। कोरोना साथ ही लाएं  सुरक्षा की दृष्टि से उपकरण - सामग्री विशेष आवश्यकताएं और स्कूल सुरक्षा के तहत विभिन्न उपकरण स्कूल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए खर्च किए जा सकते हैं।  स्कूल सुरक्षा के तहत आपदा प्रबंधन भी एहतियाती उपायों के भाग के रूप में आपदा नियोजन पर खर्च किया जा सकता है, जैसे कि स्कूल में प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा, बिजली की धाराओं से आग, बिजली की धाराओं से आग, प्रयोगशालाओं में रासायनिक विस्फोटों से आग या अन्य स्थितियों या उपकरणों की देखभाल करने के लिए कोरोना महामारी।  प्राथमिक विद्यालय के लिए अनुदान जिला स्तर पर डीपीसी कार्यालय को आवंटित किया गया है और माध्यमिक स्कूलों के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय को अनुदान आवंटित किया गया है।  जिला स्तर से अनुरोध है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर स्कूलों को अनुदान के आवंटन के बारे में अपने स्तर से आवश्यक निर्देश दें और यदि यह चालू वित्तीय वर्ष के अंत से पहले खर्च किया जाता है।  इराचली सचिन राज्य परियोजना कार्यालय, शिक्षा, गांधीनगर।  एसपीडी श्री, प्रधान कार्यालय माननीय, एएसपीडी श्री, प्रधान कार्यालय।






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नेट बेकिंग के युग में, ई-सिटर को आधार कार्ड नंबर दिए बिना नेट बेकिंग की उम्र में नई तरकीबें मिल रही हैं

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 अहमदाबाद: नेट बेकिंग के युग में, ई-सिटर को आधार कार्ड नंबर दिए बिना नेट बेकिंग की उम्र में नई तरकीबें मिल रही हैं अगर टीकाकरण पंजीकरण के नाम पर चीटर सक्रिय कोरोना वैक्सीन कहा जाता है।  लोग कोरोना से घबरा गए हैं और टीकाकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  ऐसे चरण में, टीकाकरण पंजीकरण के नाम पर कॉल करके और आधार कार्ड नंबर प्राप्त करके ई-धोखा हुआ!  इसमें सतर्कता बरतने की अपील की गई है।  आधार कार्ड नंबर के बाद ओटीपी प्राप्त करना धोखाधड़ी हो सकता है: आपके बैंक खाते से पैसे के लिए डोर-टू-डोर संपर्क करके ई-रिटेलर्स के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता हो सकती है।  पंजीकरण हो रहा है।  अब, ई-चेटर्स ओटीपी नंबर कोरोना वैक्सीन प्राप्त करने का एक तरीका लेकर आए हैं।  साइबर अपराध सूत्रों का कहना है कि पंजीकरण के लिए फोन कॉल शुरू हो गए हैं।  अब तक कोरोना टीकाकरण के लिए, आधार कार्ड पंजीकरण के नाम पर धोखा देने की संख्या को कोरोना टीकाकरण नाम दर्ज करने के लिए कहा गया है।  आधार मामला पुलिस तक नहीं पहुंचा है।  कार्ड का नंबर दें थोड़ा है, लेकिन ई-चीटिंग इस बार आपके मोबाइल फोन पर हो सकती है।  कोरोना टीकाकरण के पंजीकरण के साथ ओटीपी आवश्यक है।  अगर यह फोन पर नहीं किया गया है, तो ऐसे फोन को ओटीपी बताएं, ताकि जब आप आएं तो आपका बैंकिंग, आधार कार्ड पंजीकरण हो जाए।  यह सलाह दी जाती है कि अन्य विवरण न दें बल्कि ओटीपी नंबर दें।



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नेट बेकिंग के युग में, ई-सिटर को आधार कार्ड नंबर दिए बिना नेट बेकिंग की उम्र में नई तरकीबें मिल रही हैं




मालाबार नौसैनिक अभ्यास

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मालाबार नौसैनिक अभ्यास: क्वाड देशों के साथ भारत का नौसेना-अभ्यास शुरू मालाबार नौसैनिक अभ्यास के 24वें संस्करण का पहला चरण 03 नवंबर 2020 को बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम में शुरू हुआ और यह अभ्यास 06 नवंबर तक जारी रहेगा. कोविड-19 के बीच आयोजित अभ्यास के पहले चरण में क्रॉस डेक फ्लाइंग, ऐंटी-सबमरीन समेत अन्य अभ्यास होंगे. भारतीय नौसेना का नेतृत्व ईस्टर्न फ्लीट के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग रियर एडमिरल संजय वात्स्यायन कर रहे हैं. भारत ने पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी सैन्य तनातनी के बीच अपने बहुचर्चित नौसैनिक अभ्यास मालाबार 2020 में ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करने का घोषणा किया है. इस नौसेना अभ्यास में शामिल देश इस नौसेना अभ्यास में भारत और इसके मित्र देश अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. इसमें अमेरिका का गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस जॉन एस मैकेन, ऑस्ट्रेलिया की लॉन्ग रेंज फ्रिगेट एचएमएएस बलारात और एमएच 60 हेलीकॉप्टर हिस्सा ले रहे हैं. जापान की ओर से उसका डिस्ट्रॉयर जेएस ओनामी और इंटीग्रल एसएच हेलीकॉप्टर हिस्सा ले रहा है.    भारतीय नौसेना की ओर से डिस्ट्रॉयर आईएनएस रणविजय, फ्रिगेट आईएनएस शिवालिक, ऑफ शोर पेट्रोल वेसेल आईएनएस सुकुन्या, फ्लीट सपोर्ट शिप आईएनएस शक्ति और सबमरीन आईएनएस सिन्धुराज नौसैनिक अभ्यास में शामिल हैं.  मालाबार अभ्यास का दूसरा चरण मालाबार अभ्यास का दूसरा चरण 17 से 20 नवंबर के बीच अरब सागर में होगा. चीन इस अभ्साय को हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में इन चारों देशों के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहा है और इसे अपने लिए खतरा मान रहा है. पहली बार चार देशों की नौसेनाएं एकसाथ यह पहला मौका होगा जब क्वाड के चारों देशों भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया की नौसेनाएं एक साथ युद्धाभ्यास करेंगी. अक्टूबर 2020 के पहले हफ्ते में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में ऑस्ट्रेलिया को मालाबार अभ्यास में शामिल करने पर चर्चा हुई थी. भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि दूसरे देशों के साथ भारत समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना चाहता है. इसलिए ऑस्ट्रेलिया की नौसेना को मालाबार अभ्यास में बुलाया गया है. आस्ट्रेलिया ने मालाबार अभ्यास में 2007 में हिस्सा लिया आस्ट्रेलिया ने मालाबार अभ्यास में 2007 में हिस्सा लिया था, लेकिन चीन की आपत्तियों के बाद वह इससे अलग हो गया था. यह रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र अफ्रीका के पूर्वी तट से पूर्वी एशिया तक फैले हुए जलीय भागों तक विस्तारित है. मालाबार नौसैनिक अभ्यास: एक नजर में मालाबार नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत साल 1992 में भारत-अमेरिका के बीच हुई थी. साल 2015 में जापान इसका हिस्सा बना. यह सालाना अभ्यास साल 2018 में फिलीपींस के समुद्री इलाके गुआम तट और साल 2019 में जापान के समुद्री इलाके में हुआ था. मालाबार नौसैनिक अभ्यास भारत-अमेरिका-जापान की नौसेनाओं के बीच वार्षिक रूप से आयोजित किया जाने वाला एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास है. साल 2015 में इस अभ्यास में जापान के शामिल होने के बाद से यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया. ऑस्ट्रेलिया पिछले कई सालों से इस युद्धाभ्यास में शामिल होने को लेकर रुचि दिखा रहा था. चीन के प्रति बढ़ती नकरात्मक धारणाओं और उसके साथ रिश्ते कटु होने के बाद ऑस्ट्रेलिया इस बार युद्धाभ्यास में शामिल हो रहा है.

शांति स्वरूप भटनागर Shanti swaroop Bhatnagar Biography in hindi Image of Shanti swaroop Bhatnagar Awards Shanti swaroop Bhatnagar Awards Shanti Swaroop Bhatnagar invention Shanti Swaroop Baudh wikipedia Hindigyanisthan

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 शांति स्वरूप भटनागर



उपनाम: अनुसंधान प्रयोगशालाओं के पिता

जन्म तिथि: 21 फरवरी 1894

जन्म स्थान: भीरा, शाहपुर जिला, ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान में)

मृत्यु: 1 जनवरी 1955 (आयु 60 वर्ष)

कार्य: प्रोफेसर, वैज्ञानिक

पुरस्कार: ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (1936), नाइट बैचलर (1941), फैलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी (1943), पद्म भूषण (1954)

जीवनसाथी: लाजवंती


उपलब्धियां:-

डॉ शांति स्वरूप भटनागर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के संस्थापक निदेशक (और बाद में पहले महानिदेशक) थे, जिन्हें बारह वर्षों में बारह राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। डॉ भटनागर ने स्वतंत्र एस एंड टी इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और भारत की एस एंड टी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ भटनागर ने समवर्ती रूप से सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पहले अध्यक्ष थे। वह शिक्षा मंत्रालय के सचिव और सरकार के शैक्षिक सलाहकार थे। वह प्राकृतिक संसाधन और वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्रालय के पहले सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग के सचिव भी थे। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) की स्थापना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मैग्नेटो रसायन विज्ञान और इमल्शन के भौतिक रसायन विज्ञान के क्षेत्रों में उनके अनुसंधान योगदान को व्यापक रूप से मान्यता दी गई थी। 1936 में डॉ भटनागर को ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर (OBE) से सम्मानित किया गया था। उन्हें 1941 में 1941 में फेलो ऑफ रॉयल सोसाइटी, लंदन का फेलो चुना गया। उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 1954 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।


प्रारंभिक जीवन:-

सर शांति स्वरूप भटनागर का जन्म 21 फरवरी 1894 को ब्रिटिश भारत के पंजाब क्षेत्र के भीरा में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनके पिता, परमेश्वरी सहाय भटनागर की मृत्यु हो गई, जब वह सिर्फ कुछ महीने के थे। उनका पालन-पोषण उनके नाना के घर में हुआ, जो एक इंजीनियर थे, और युवा शांति स्वरूप के लिए प्रेरणा थे, जिन्होंने कम उम्र से ही इंजीनियरिंग और विज्ञान में रुचि विकसित की थी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दयानंद एंग्लो-वैदिक हाई स्कूल, सिकंद्राबाद में की थी।


1911 में, उन्होंने दयाल सिंह कॉलेज, लाहौर में प्रवेश लिया, जहाँ उन्होंने नाट्यशास्त्र में भी रुचि ली और एक-एक नाटक भी लिखे। 1913 में, उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय की इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की, और फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज में शामिल हो गए जहाँ से उन्होंने 1916 में भौतिकी में बीएससी किया और 1919 में रसायन विज्ञान में एमएससी किया।


शिक्षा और अनुसंधान कार्य:-

भटनागर को दयाल सिंह कॉलेज ट्रस्ट से विदेश में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति मिली। वह इंग्लैंड के माध्यम से अमेरिका के लिए रवाना हुआ, लेकिन इंग्लैंड में वह अमेरिका के लिए रवाना नहीं हो पाया क्योंकि पहले विश्व युद्ध के मद्देनजर सभी जहाज अमेरिकी सैनिकों के लिए आरक्षित थे। उन्हें यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। 1921 में, उन्होंने अपना DSc अर्जित किया। लंदन में रहते हुए, उन्हें ब्रिटिश डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च फ़ेलोशिप से भी नवाज़ा गया।


अगस्त 1921 में, वह भारत लौट आए और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में रसायन शास्त्र के प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए। उन्होंने तीन साल तक काम किया। फिर वह लाहौर में भौतिक रसायन विज्ञान के प्रोफेसर और पंजाब विश्वविद्यालय के रासायनिक रसायन प्रयोगशाला के निदेशक के रूप में चले गए। मूल वैज्ञानिक कार्यों में यह उनके जीवन का सबसे सक्रिय काल था। उनके शोध के हितों में इमल्शन, कोलाइड और औद्योगिक रसायन शामिल थे। उनके शोध कार्य मैग्नेटो-रसायन विज्ञान के क्षेत्र में थे, रासायनिक प्रतिक्रियाओं के अध्ययन के लिए चुंबकत्व का उपयोग।


1928 में, उन्होंने और के.एन. माथुर ने संयुक्त रूप से भटनागर-माथुर चुंबकीय हस्तक्षेप संतुलन का आविष्कार किया। उस समय चुंबकीय गुणों को मापने के लिए यह सबसे संवेदनशील उपकरणों में से एक था। 1931 में, रॉयल सोसाइटी में इसका प्रदर्शन किया गया था और बाद में मेसर्स एडम हिल्गर और कंपनी, लंदन द्वारा इसका विपणन किया गया।


पेशेवर उपलब्धियां:-

1921 से 1940 तक भटनागर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे; पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय में। एक बहुत ही प्रेरक शिक्षक के रूप में उनकी प्रतिष्ठा थी।


भटनागर का पहला औद्योगिक समाधान मवेशियों के लिए बगास (प्रयुक्त गन्ना) को भोजन-केक में परिवर्तित करने की प्रक्रिया विकसित करना था। उन्होंने दिल्ली क्लॉथ एंड जनरल मिल्स के लिए औद्योगिक समस्याओं को भी हल किया, जे.के. मिल्स लि, टाटा ऑयल मिल्स लि और कई अन्य।


उनका एक प्रमुख नवाचार कच्चे तेल की ड्रिलिंग के लिए प्रक्रिया में सुधार कर रहा था जो लंदन के स्टील ब्रदर्स एंड कंपनी लिमिटेड के लिए किया गया था। कंपनी ने भटनागर को रुपये की राशि की पेशकश की। विश्वविद्यालय के माध्यम से अनुसंधान कार्य के लिए 150,000 और इसका उपयोग पेट्रोलियम अनुसंधान विभाग की स्थापना के लिए किया गया था। इसने पेट्रोलियम उत्पाद और प्रक्रिया से संबंधित अनुसंधान में मदद की।


भारत में औद्योगिक अनुसंधान में योगदान:-

1940 में, भारत सरकार द्वारा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान बोर्ड (BSIR) का गठन किया गया और भटनागर को निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया।


1942 में, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) का गठन एक स्वायत्त निकाय के रूप में किया गया था। 1943 में, भटनागर द्वारा पांच राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इनमें राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, ईंधन अनुसंधान स्टेशन; जिसे भारत में वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं की शुरुआत के लिए स्थापित किया गया था।


सीएसआईआर में, उन्होंने उस समय के कई होनहार युवा वैज्ञानिकों का भी उल्लेख किया। भटनागर के साथ होमी जहांगीर भाभा, प्रशांत चंद्र महालनोबिस, विक्रम साराभाई और अन्य ने भारत के स्वतंत्रता के बाद के विज्ञान और प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद की।


भारत की स्वतंत्रता के बाद, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की स्थापना डॉ भटनागर की अध्यक्षता में की गई थी। वह इसके पहले महानिदेशक बने।


उन्होंने कुल बारह राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की स्थापना की जिसमें केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी संस्थान, मैसूर शामिल हैं; राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला, जमशेदपुर; सेंट्रल फ्यूल इंस्टीट्यूट, धनबाद को कुछ नाम दिए।


उन्होंने सरकार के शिक्षा और शैक्षिक सलाहकार मंत्रालय के सचिव के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


मृत्यु:-

1 जनवरी 1955 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई, केवल 60 वर्ष की आयु।


सम्मान और मान्यताएँ:-

भटनागर को शुद्ध और अनुप्रयुक्त रसायन विज्ञान में उनके योगदान के लिए 1936 में ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (OBE) के एक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। 1941 में विज्ञान की उन्नति में उनके योगदान के लिए उन्हें "सर" की उपाधि दी गई। 1943 में, सोसायटी ऑफ़ केमिकल इंडस्ट्री, लंदन ने उन्हें मानद सदस्य और बाद में उपराष्ट्रपति के रूप में चुना। 1943 में भटनागर को रॉयल सोसाइटी (FRS) का फेलो चुना गया।


भारत में स्वतंत्रता के बाद, वह इंडियन केमिकल सोसाइटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें 1954 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।


विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार उनके सम्मान में स्थापित किया गया था, जो भारत में विज्ञान के लिए सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है।


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सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर, subrahmanyan Chandrasekhar biography in hindi indian scientist, Hindigyanisthan

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सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर

जन्म: 19 अक्टूबर 1910
लाहौर, भारत (अब पाकिस्तान)
मृत्यु: 21 अगस्त 1995
शिकागो, इलिनोइस, संयुक्त राज्य अमेरिका
चंद्रशेखर को सितारों के गुरुत्वाकर्षण पतन पर उनके सैद्धांतिक काम के लिए भौतिकी नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।


सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर जीवन भर चंद्रा के नाम से जाने जाते थे। उनके पिता सी सुब्रह्मण्यन अय्यर थे और उनकी माता सीतालक्ष्मी अय्यर थीं। उनके पिता, एक भारतीय सरकारी लेखा परीक्षक, जो उत्तर-पश्चिम रेलवे का लेखा-जोखा का कार्य करते थे। चंद्रशेखर एक ब्राह्मण परिवार से आये, जिसके पास भारत के मद्रास (अब चेन्नई) के पास कुछ जमीन थी। चंद्रा एक बड़े परिवार से थे, जिसमें दो बड़ी बहनें, तीन छोटे भाई और चार छोटी बहनें थीं। जब चंद्रा छोटे थे तब उनके माता-पिता मद्रास (अब चेन्नई) चले गए और, जैसे-जैसे वे बड़े होते गए, उन्हें एक शिक्षा लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जो उन्हें अपने पिता की सरकारी सेवा में आने के बाद देखते हैं । हालाँकि चंद्रा एक वैज्ञानिक बनना चाहता था और उसकी माँ ने उसे इस मार्ग पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके अपने चाचा सर चंद्रशेखर वेंकट रमन में एक रोल मॉडल थे, जिन्होंने 1930 में रमन स्कैटरिंग और रमन प्रभाव की अपनी 1928 की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार जीता, जो प्रकाश की किरण होने पर प्रकाश की तरंग दैर्ध्य में परिवर्तन होता है। अणुओं द्वारा विक्षेपित किया जाता है। चंद्रा ने अपने चाचा के साथ आदान-प्रदान किया।

चंद्रा ने मद्रास विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज में अध्ययन किया, और उन्होंने अपना पहला शोध पत्र वहाँ रहते हुए भी लिखा। पेपर को प्रोसीडिंग ऑफ द रॉयल सोसाइटी में प्रकाशित किया गया था, जहाँ इसे राल्फ फाउलर द्वारा प्रस्तुत किया गया था। चंद्रा के साथ प्रेसीडेंसी कॉलेज में ललिता दोरीस्वामी भी थीं, जो उस परिवार की बेटी थीं, जहां चंद्रा का परिवार मद्रास में रहता था। वे इस समय शादी करने के लिए व्यस्त हो गए। चंद्रा ने इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई के लिए भारत सरकार से छात्रवृत्ति प्राप्त की और 1930 में उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज, इंग्लैंड में अध्ययन करने के लिए भारत छोड़ दिया। 1933 से 1937 तक उन्होंने कैम्ब्रिज में शोध किया, लेकिन 1936 में 11 सितंबर को ललिता से शादी करने के लिए वे भारत लौट आए। मेस्टेल लिखते हैं:
उनकी शादी, असाधारण, व्यवस्था के बजाय आपसी पसंद से हुई थी। ललिता का परिवार भी शिक्षा में काफी दिलचस्पी रखता था, और अपनी शादी से पहले उसने स्कूल हेडमिस्ट्रेस के रूप में काम किया। वह चंद्रशेखर के लिए अपने पचास-नौ वर्षों के दौरान एक साथ मौजूद था। शादी के कोई बच्चे नहीं थे।
वे 1936 में कैम्ब्रिज लौट आए लेकिन अगले वर्ष चंद्रा शिकागो विश्वविद्यालय में उन कर्मचारियों में शामिल हो गए जहाँ उन्हें जीवन भर रहना था। सबसे पहले उन्होंने विस्कॉन्सिन में शिकागो विश्वविद्यालय के हिस्से येरेस वेधशाला में काम किया। बाद में वह शिकागो शहर में विश्वविद्यालय परिसर में काम करने चले गए। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने मैरीलैंड के एबरडीन प्रोविंग ग्राउंड में बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं में काम किया। 1943 में लिखी गई दो रिपोर्टें बताती हैं कि इस समय वह किस प्रकार की समस्याओं पर काम कर रही थीं: पहला है विमान में झटका देने वाली तरंगों के क्षय पर जबकि दूसरा विस्फोट की लहर का सामान्य प्रतिबिंब है।

उन्हें 1952 में शिकागो विश्वविद्यालय के मॉर्टन डी हल प्रतिष्ठित सेवा के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था। हालांकि उस समय तक चंद्रा 15 साल से संयुक्त राज्य अमेरिका में काम कर रहे थे, लेकिन न तो उन्होंने और न ही उनकी पत्नी ने पहले नागरिकता ली थी। हालांकि, दोनों अगले वर्ष में अमेरिकी नागरिक बन गए और देश के जीवन में बहुत एकीकृत हो गए। जब 1964 में चंद्रा को कैम्ब्रिज में एक कुर्सी की पेशकश की गई तो उन्होंने जवाब दिया कि उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है, इसलिए एक ऐसी स्थिति को ठुकरा दिया जो एक युवा के रूप में उन्हें सबसे अधिक वांछनीय लगी होगी।

चंद्रशेखर ने लगभग 400 पत्र-पत्रिकाओं और कई पुस्तकों का प्रकाशन किया। उनके शोध के हित असाधारण रूप से व्यापक थे लेकिन हम उन्हें विषयों और किसी न किसी अवधि में विभाजित कर सकते हैं जब वह इन विशेष विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। पहले उन्होंने तारकीय संरचना का अध्ययन किया, जिसमें 1929 से 1939 तक सफेद बौनों का सिद्धांत शामिल था, फिर 1939 से 1943 तक तारकीय गतिकी। इसके बाद उन्होंने विकिरण हस्तांतरण के सिद्धांत और 1943 से 1950 तक हाइड्रोजन के ऋणात्मक आयन के क्वांटम सिद्धांत को देखा। 1950 से 1961 तक हाइड्रोडायनामिक और हाइड्रोमैग्नेटिक स्थिरता के बाद। 1960 के दशक के अधिकांश समय में उन्होंने संतुलन और संतुलन के दीर्घवृत्तीय आंकड़ों की स्थिरता का अध्ययन किया, लेकिन इस अवधि के दौरान उन्होंने सामान्य सापेक्षता, विकिरण प्रतिक्रिया प्रक्रिया और स्थिरता के विषयों पर भी काम करना शुरू किया। सापेक्ष सितारों की। 1971 से 1983 की अवधि के दौरान उन्होंने ब्लैक होल के गणितीय सिद्धांत पर शोध किया, फिर अपने जीवन की अंतिम अवधि के लिए उन्होंने गुरुत्वाकर्षण तरंगों के टकराने के सिद्धांत पर काम किया।
1930 में चंद्रा ने दिखाया कि सूर्य के 1.4 गुना से अधिक द्रव्यमान का एक तारा (जिसे अब चंद्रशेखर की सीमा के रूप में जाना जाता है) को उस समय ज्ञात किसी भी वस्तु के विपरीत भारी घनत्व की वस्तु में गिरकर अपना जीवन समाप्त करना पड़ा। उसने कहा:-
... एक अन्य संभावनाओं पर अटकलें छोड़ रहा है ...
ब्लैक होल जैसी वस्तुएं। हालांकि, इस काम के कारण एक प्रतियोगिता हुई। चंद्रा और एडिंगटन के बीच रोवर्स ने चंद्रा के काम का वर्णन किया:
... सापेक्षतावादी अध: पतन सूत्र का लगभग एक रिडक्टियो विज्ञापन अनुपस्थिति।
एडिंगटन, जो इस समय सापेक्षता के एक प्रमुख विशेषज्ञ थे, ने तर्क दिया कि: -
... सापेक्षता पतन जैसी कोई चीज नहीं है!।
एडिंगटन के साथ विवाद से चंद्रा बहुत निराश था और कुछ हद तक उसने इस तरह प्रभावित किया कि उसने अपने जीवन के बाकी हिस्सों में काम किया। कई वर्षों बाद चंद्रा को 1983 में भौतिकी के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था-
... सितारों की संरचना और विकास के लिए महत्वपूर्ण भौतिक प्रक्रियाओं के उनके सैद्धांतिक अध्ययन के लिए।
उन्होंने इस काम का वर्णन द गणितीय थ्योरी ऑफ़ ब्लैक होल्स (1983) में किया। वह उसने कहा:-
... उन तरीकों में से एक जिसमें सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत की भौतिक सामग्री का पता लगाया जा सकता है, वह यह है कि इसकी गणितीय संरचना के सामंजस्यपूर्ण सामंजस्य में दृढ़ विश्वास के साथ समस्याओं के निरूपण में किसी व्यक्ति के सौंदर्य आधार की संवेदनशीलता को अनुमति दी जाए।
उनकी अन्य पुस्तकों में स्टेलर स्ट्रक्चर (1939), स्टेलर डायनामिक्स के सिद्धांत (1942), रेडियेटिव ट्रांसफर (1950), प्लाज़्मा फिजिक्स (1960), हाइड्रोडायनामिक एंड हाइड्रोमोमैग्नेटिक डिसएबिलिटी (1961), इलिप्सोइडाइडल इक्वल्स ऑफ इक्विलिब्रियम (1969) के अध्ययन का एक परिचय शामिल है। ), ट्रुथ एंड ब्यूटी: एस्थेटिक्स एंड मोटिवेशन्स इन साइंस (1987), और न्यूटन की प्रिंसिपिया फॉर द कॉमन रीडर (1995)। इन ग्रंथों ने गणितीय खगोल विज्ञान में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। उदाहरण के लिए एक समीक्षक ने हाइड्रोडायनामिक और हाइड्रोमैग्नेटिक स्टेबिलिटी के बारे में लिखा:
... लेखक के पास थर्मल और घूर्णी अस्थिरता के अपने मुख्य विषयों के उपचार में कोई सहकर्मी नहीं है।
इसके अलावा तारकीय गतिशीलता के सिद्धांतों की समीक्षा सही ढंग से दावा करती है: -
पुस्तक असाधारण स्पष्टता के साथ लिखी गई है ... [इसे] खगोलविद, गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी के लिए उत्तेजक साबित होना चाहिए।
1962 में चंद्रशेखर को रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन के शाही पदक से सम्मानित किया गया: -
... गणितीय भौतिकी में उनके विशिष्ट शोधों की मान्यता में, विशेष रूप से चुंबकीय क्षेत्रों के साथ और बिना तरल पदार्थों में संवहन गतियों की स्थिरता से संबंधित।
रॉयल सोसाइटी ने उन्हें 1984 में अपने कोपले पदक से सम्मानित किया: -
... स्टेलर संरचना, विकिरण के सिद्धांत, हाइड्रोडायनामिक स्थिरता और सापेक्षता सहित सैद्धांतिक भौतिकी पर उनके विशिष्ट कार्य की मान्यता में।
1952 से 1971 तक चंद्रशेखर एस्ट्रोफिजिकल जर्नल के संपादक रहे। यह पत्रिका मूल रूप से शिकागो प्रकाशन का एक स्थानीय विश्वविद्यालय था, लेकिन यह एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का राष्ट्रीय प्रकाशन बनने के लिए विकसित हुआ।

चंद्रशेखर को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें से 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार, 1962 का रॉयल सोसाइटी का रॉयल मेडल और 1984 का कोप्ले मेडल, हमने ऊपर बताया है। हालांकि, हमें यह भी उल्लेख करना चाहिए कि उन्हें पैसिफिक के एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के ब्रूस पदक, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (अमेरिका) के हेनरी ड्रेपर पदक और रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था।

चंद्रा 1980 में सेवानिवृत्त हुए लेकिन शिकागो में रहना जारी रखा, जहां उन्हें 1985 में प्रोफेसर एमेरिटस बनाया गया था। उन्होंने न्यूटन और माइकल एंजेलो जैसे विचार-उत्तेजक व्याख्यान देना जारी रखा, जिसे उन्होंने 1994 में लिंडौ में आयोजित नोबेल पुरस्कार विजेता की बैठक में दिया था। उन्होंने सिस्टिन चैपल और न्यूटन के प्रिंसिपिया में माइकल एंजेलो के भित्तिचित्रों की तुलना की: -
... इस बात के बड़े संदर्भ में कि क्या वैज्ञानिकों और कलाकारों की प्रेरणा में कोई समानता उनके संबंधित रचनात्मक quests में है।
एक समान नस में अन्य व्याख्यान में शेक्सपियर, न्यूटन और बीथोवेन या रचनात्मकता के पैटर्न और सौंदर्य की धारणा और विज्ञान की खोज शामिल है।

चंद्रशेखर अपने जीवन के अंतिम महीनों में 85 वर्ष की आयु में अंतिम प्रमुख पुस्तक न्यूटन के प्रिंसिपल फॉर द कॉमन रीडर में सक्रिय और प्रकाशित रहे। इस काम के प्रकाशन के कुछ ही समय बाद वह दिल की विफलता से मर गया और शिकागो में दफन हो गया। वह अपनी पत्नी ललिता से बच गया था। आइए हम तायलर के शब्दों को उद्धृत करते हुए इस जीवनी को समाप्त करते हैं:
[चंद्रशेखर] एक शास्त्रीय अनुप्रयुक्त गणितज्ञ था जिसका शोध मुख्य रूप से खगोल विज्ञान में लागू किया गया था और जिसकी तरह शायद फिर कभी नहीं देखा जाएगा।
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जयप्रकाश नारायण

जन्म: 11 अक्टूबर, 1902
निधन: 8 अक्टूबर, 1979 (आयु 76 वर्ष)
कार्य: क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ 
जयप्रकाश नारायण (1902-1979), भारतीय राष्ट्रवादी और सामाजिक सुधार के नेता, मोहनदास गांधी के बाद भारत के प्रमुख आलोचक थे।

मोहनदास गांधी के शिष्य और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता, जयप्रकाश नारायण अपने जीवन के अंत तक अपनी जन्मभूमि में एक विद्रोही बने रहे। जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को सीताबदियारा, सारन जिले, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (वर्तमान बलिया जिला, उत्तर प्रदेश, भारत) में हुआ था। सीताबदीयारा एक बड़ा गाँव है, जो दो राज्यों और तीन जिलों - बिहार के सारन और भोजपुर और उत्तर प्रदेश के बलिया में फैला है।उनका घर बाढ़ प्रभावित घाघरा नदी के किनारे था। हर बार जब नदी बहती थी, तो घर थोड़ा क्षतिग्रस्त हो जाता था, आखिरकार परिवार को कुछ किलोमीटर दूर एक बस्ती में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था, जिसे अब जय प्रकाश नगर के रूप में जाना जाता है और उत्तर प्रदेश में पड़ता है।

वह एक कायस्थ परिवार से आए थे। वह हरसू दयाल और फूल रानी देवी की चौथी संतान थे। उनके पिता हरसू दयाल राज्य सरकार के नहर विभाग में एक जूनियर अधिकारी थे और अक्सर इस क्षेत्र का दौरा करते थे। जब नारायण 9 साल के थे, तब उन्होंने पटना के कॉलेजिएट स्कूल में 7 वीं कक्षा में दाखिला लेने के लिए अपना गाँव छोड़ दिया। जेपी एक छात्रावास-सरस्वती भवन में रुके थे, जिसमें ज्यादातर लड़के थोड़े बड़े थे। उनमें बिहार के कुछ भावी नेता भी शामिल थे, जिनमें इसके पहले मुख्यमंत्री, कृष्ण सिंह, उनके सहायक अनुग्रही नारायण सिन्हा और कई अन्य शामिल थे, जिन्हें राजनीति और अकादमिक जगत में व्यापक रूप से जाना जाता था।

अक्टूबर 1920 में, 18 वर्षीय नारायण ने ब्रज किशोर प्रसाद की 14 वर्षीय बेटी प्रभाती देवी से शादी की, जो अपने आप में एक स्वतंत्रता सेनानी थीं। उनकी शादी के बाद, चूंकि नारायण पटना में काम कर रहे थे और उनकी पत्नी के लिए उनके साथ रहना मुश्किल था, गांधी के निमंत्रण पर, प्रभाती साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) में रहने लग गई।जयप्रकाश, कुछ दोस्तों के साथ, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को 1919 के रौलट एक्ट के पारित होने के खिलाफ गांधी द्वारा शुरू किए गए असहयोग आंदोलन के बारे में बोलने के लिए गए थे। मौलाना एक शानदार वक्ता थे और अंग्रेजी छोड़ने का उनका आह्वान शिक्षा "एक तूफान से पहले पत्तियों की तरह: जयप्रकाश बह गया था और क्षण भर के लिए आसमान पर चढ़ गया था। एक महान विचार की हवा के साथ ऊपर उठने का संक्षिप्त अनुभव उसके भीतर होने पर छाप छोड़ गया।" जयप्रकाश ने मौलाना की बातों को दिल से लगा लिया और अपनी परीक्षाओं के लिए सिर्फ 20 दिन शेष रहते बिहार नेशनल कॉलेज छोड़ दिया। जयप्रकाश बिहार विद्यापीठ में शामिल हो गए, राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित एक कॉलेज और गांधीवादी अनुग्रही नारायण सिन्हा के पहले छात्रों में से एक बने। अपने स्नातक होने से ठीक पहले, उन्होंने ब्रिटिश सहायता प्राप्त संस्थानों को छोड़ने के लिए भारतीय राष्ट्रवादियों के आह्वान का पालन किया। 1922 में, वे संयुक्त राज्य अमेरिका गए, जहां उन्होंने कैलिफोर्निया, आयोवा, विस्कॉन्सिन और ओहियो राज्य के विश्वविद्यालयों में राजनीतिक विज्ञान और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया।

समाजवादी और प्रतिरोध नेता:-
संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने सात वर्षों के दौरान, नारायण ने फल पिकर, जैम पैकर, वेटर, मैकेनिक और सेल्समैन के रूप में काम करके अपने ट्यूशन का भुगतान किया। उनकी राष्ट्रवादी और साम्राज्यवाद-विरोधी प्रतिबद्धता मार्क्सवादी मान्यताओं और कम्युनिस्ट गतिविधियों में भागीदारी में विकसित हुई। लेकिन नारायण सोवियत संघ की नीतियों के विरोधी थे और 1929 में भारत लौटने पर संगठित साम्यवाद को खारिज कर दिया।

नारायण कांग्रेस पार्टी के सचिव बने, जिसके नेता जवाहरलाल नेहरू थे, बाद में पहले स्वतंत्र भारतीय प्रधानमंत्री बने। जब पार्टी के अन्य सभी नेताओं को गिरफ्तार किया गया, तो नारायण ने अंग्रेजों के खिलाफ अभियान चलाया; फिर उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। 1934 में, नारायण ने कांग्रेस पार्टी में एक समाजवादी समूह के गठन में अन्य मार्क्सवादियों का नेतृत्व किया।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, नारायण अंग्रेजों के हिंसक विरोध का नेतृत्व करके एक राष्ट्रीय नायक बन गए। मोहनदास गांधी के नेतृत्व में प्रतिरोध आंदोलन को गले लगाते हुए, नारायण ने अहिंसा, इंजीनियरिंग हमले, ट्रेन के मलबे और दंगों के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्हें बार-बार अंग्रेजों द्वारा जेल में डाला गया था, और उनके भागने और वीर गतिविधियों ने जनता की कल्पना पर कब्जा कर लिया था।

"सेंटली पॉलिटिक्स" के वकील:-
भारत के स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, हिंसा और मार्क्सवाद नारायण में भटक गया। उन्होंने 1948 में अपने समाजवादी समूह को कांग्रेस पार्टी से बाहर कर दिया और बाद में इसे पीपुल्स सोशलिस्ट पार्टी बनाने के लिए एक गाँधीवादी उन्मुख पार्टी के साथ मिला दिया। नारायण को नेहरू का उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन 1954 में उन्होंने एक ऐसे सन्यासी विनोबा भावे की शिक्षाओं का पालन करने के लिए दलगत राजनीति का त्याग किया, जिन्होंने स्वैच्छिक पुनर्वितरण के लिए भूमि का आह्वान किया था। उन्होंने एक गांधीवादी प्रकार की क्रांतिकारी कार्रवाई को अपनाया, जिसमें उन्होंने लोगों के दिलो-दिमाग को बदलने की कोशिश की। "संत राजनीति" के एक वकील, उन्होंने नेहरू और अन्य नेताओं से इस्तीफा देने और गरीब जनता के साथ रहने का आग्रह किया।
नारायण ने कभी सरकार में कोई औपचारिक पद नहीं संभाला, लेकिन दलगत राजनीति से बाहर एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्व बने रहे। अपने जीवन के अंत में, उन्होंने प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी, मोहनदास गांधी की बेटी की बढ़ती सत्तावादी नीतियों के एक सक्रिय आलोचक के रूप में प्रमुखता हासिल की। उनके सुधार आंदोलन ने "पार्टीविहीन लोकतंत्र," सत्ता के विकेंद्रीकरण, ग्राम स्वायत्तता और एक अधिक प्रतिनिधि विधायिका का आह्वान किया।

आपातकाल:-
खराब स्वास्थ्य के बावजूद, नारायण ने सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में बिहार में छात्र आंदोलनकारियों का नेतृत्व किया और उनके नेतृत्व में, पश्चिमी गुजरात राज्य में पीपुल्स फ्रंट ने सत्ता संभाली। नारायण को प्रतिक्रियावादी फासीवादी बनाकर इंदिरा गांधी ने जवाब दिया। 1975 में, जब गांधी को भ्रष्ट आचरण का दोषी ठहराया गया, तो नारायण ने उनके इस्तीफे और सरकार के साथ शांतिवादी असहयोग के एक बड़े आंदोलन का आह्वान किया। गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की, नारायण और 600 अन्य विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया और प्रेस की सेंसरशिप लगा दी। जेल में, नारायण का स्वास्थ्य बिगड़ गया। पांच महीने के बाद, उन्हें रिहा कर दिया गया। 1977 में, नारायण द्वारा विपक्षी ताकतों को एकजुट करने के लिए बड़े पैमाने पर धन्यवाद, गांधी को एक चुनाव में हराया गया था।

नारायण का निधन मधुमेह और हृदय रोग के प्रभाव से 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में उनके घर पर हुआ। उसके घर के बाहर पचास हज़ार शोक-संतप्त लोग इकट्ठा हुए, और हजारों लोगों ने उसका पीछा किया। नारायण को "राष्ट्र की अंतरात्मा" कहते हुए, प्रधान मंत्री चरण सिंह ने सात दिनों के शोक की घोषणा की। स्वतंत्रता आंदोलन में नारायण को मोहनदास गांधी के सहयोगियों में अंतिम के रूप में याद किया गया।

पुरस्कार:-

1). नारायण भारत के 2001 के टिकट पर

2). भारत रत्न, 1999 (मरणोपरांत) 

3).एफआईई फाउंडेशन का राष्ट्रभूषण पुरस्कार।

4). रेमन मैगसेसे पुरस्कार, सार्वजनिक सेवा के लिए 1965।

जयप्रकाश नारायण के नाम पर स्थान:-

1). पटना एयरपोर्ट।

2). 1 अगस्त 2015 को, उनके सम्मान में छपरा-दिल्ली-छपरा साप्ताहिक एक्सप्रेस का नाम बदलकर लोकनायक रखा गया।

3). दीघा-सोनपुर पुल, बिहार में गंगा नदी के पार एक रेल-सड़क पुल।

4). जयप्रकाश नारायण नगर (जेपी नगर) बैंगलोर में एक आवासीय क्षेत्र है।

5).जयप्रकाश नगर (जेपी नगर) मैसूर में एक आवासीय क्षेत्र है।
जेपी के कलात्मक चित्रण:-

1). प्रकाश झा ने 112 मिनट की एक फिल्म "लोकनायक" का निर्देशन किया, जो जय प्रकाश नारायण (जेपी) के जीवन पर आधारित है।चेतन पंडित ने उस फिल्म में जेपी की भूमिका निभाई।
2). अच्युत पोद्दार ने एबीपी न्यूज़ के शो प्रधानमन्त्री (टीवी सीरीज़) और आजतक आंदोलन में जेपी की भूमिका निभाई।